(स्पर्म) वीर्य वर्धक योग/एक्सरसाइज से बढ़ाये शुक्राणु - नपुंसकता शीघ्रपतन

वीर्य वर्धक मेडिसिन या योग ? शुक्राणु बढ़ाने के लिए उचित और सुरक्षित उपाय


स्पर्म का ज्यादा-कम होने का सीधा संबंध शरीर के अवस्था से है. आपका शरीर स्वस्थ और खानपान जितनी अच्छी होगी, स्पर्म काउंट उतना ही बेहतर होगा. इसलिए वीर्य बढ़ाने के लिए इंग्लिश मेडिसिन लेने के बजाय कुछ आसान व्यायाम करना बेहतर होता है.

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वीर्य वर्धक योग :

योग अभ्यास निचले हिस्से और पेट को मजबूत करने के साथ-साथ पेडू क्षेत्र में रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन की आपूर्ति में सुधार करने में मदद करता है। योग अभ्यास तनाव से राहत भी प्रदान करते हैं, प्रजनन ग्रंथि के स्वास्थ्य को बढ़ाते हैं, शुक्राणुओं को स्वस्थ्य बनाए रख सकते हैं और व्यक्ति की प्रजनन उम्र में वृद्धि कर सकते हैं।

8 योग व्यायाम शुक्राणु बढ़ाने के लिए :

1. धनूर आसन (धनुष मुद्रा) 

यह योग मुद्रा, प्रजनन अंगों में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है और पुरुषों में यौन शक्ति को बढ़ावा देता है। यह आसन लिंग कड़ा ना होना और समयपूर्व स्खलन को रोकने में भी मदद करता है, जिससे पुरुषों में प्रजनन क्षमता बढ़ जाती है। 
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कैसे करें: अपने पेट पर लेट जायें और अपनी बाहों को अपने शरीर के बगल में रखें और अपने पैरों को अलग रखें। घुटनों को मोड़े और अपने हाथों से घुटनों को पकड़े और श्वास भरते हुए छाती को ज़मीन से उपर उठाएँ और पैरों को कमर की ओर खींचें। चेहरे पर मुस्कान रखते हुए सामने देखिए। आसन में स्थिर रहें, अब आपका शरीर धनुष की तरह कसा हुआ है लम्बी गहरी श्वास लेते हुए, आसन में विश्राम करें। 15 से 20 सैकन्ड बाद, श्वास छोड़ते हुए, पैर और छाती को धीरे धीरे ज़मीन पर वापस लाएँ पैर को छोड़ेते हुए विश्राम करें।

यदि आप को हाई या लो ब्लड प्रेशर, हर्निया, कमर दर्द, सिर दर्द, माइग्रेन, गर्दन में चोट/क्षति, या हाल ही में पेट का ऑपरेशन हुआ हो, तो आप कृपया धनुरासन ना आजमाएँ।

2. सर्वांग आसन

सर्वांग आसन या कंधों के सहारे एक योग आसन है, जिसमें पूरे शरीर को कंधों पर संतुलित किया जाता है। यह योग आसन आपके थायराइड ग्रंथियों को उत्तेजित करता है और पूरे शरीर को मजबूत करता है।

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कैसे करें: अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और एक साथ, अपने पैरों, कूल्हे और फिर कमर को उठाएं। कूल्हों को अपने हाथों से सहारा दे और अपने पैरों को सीधे रखें। शरीर का पूरा भार आपके कन्धों व हाथों के ऊपरी हिस्से पर होना चाहिए, न कि सर और गर्दन पर। इस मुद्रा को बनाए रखें 20 से 30 सेकंड तक। आसन से बहार आने के लिए, घुटनो को धीरे से माथे के पास लें कर आयें, हाथों को ज़मीन पर रखें। बिना सर को उठाये धीरे-धीरे कमर को नीचे लें कर आयें। पैरों को ज़मीन पर लें आयें। कम से कम 60 सेकण्ड्स के लिए विश्राम करें।

3. हल आसन (हल मुद्रा) 

यह योग आसन का नाम हल शब्द से रखा गया है जो की खेती के लिए उपयोग किया जाता है. इसे करने से पेट के अंग और थायरोइड ग्रंथि उत्तेजित होतें है।

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कैसे करें: अपनी पीठ पर लेट जाओ और अपनी बाहों और हथेलियों को फर्श पर फ्लैट रखें। सांस लेने के दौरान अपने पैरों को अपने सिर पर लाएं और अपने पैरों से फर्श को छूएं। इस मुद्रा को 20 से 30 सेकंड तक रखें और सामान्य रूप से सांस लें।

4. कुंभक आसन (प्लैंक पोज़) 

यह योग अभ्यास आपकी यौन सहनशक्ति को बढ़ाता है।
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कैसे करें: अपने पेट पर लेट जाएँ और अपने हाथों को अपने कंधों के बगल में रखें और अपने शरीर को फर्श पर धक्का दें। अपने ऊपरी शरीर, पैरों और नितंबों को सीधे सीधी रेखा में फर्श से लायें। 15-30 सेकंड के लिए अपने हथेलियों और पैर की उंगलियों पर इस मुद्रा को बनाए रखें।

5. भुजंग आसन (कोबरा पोज़) 

भुजंगासन फन उठाए हुएँ साँप की तरह प्रतीत होता है, इसलिए इस आसन को कोबरा मुद्रा कहतें है। कोबरा मुद्रा आपकी पीठ की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी से तनाव मुक्त करती है। यह प्रजनन क्षमता भी को बढ़ावा देता है।

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कैसे करें: अपने पेट पर लेट जाओ और अपने कंधों के बगल में दोनों हथेलियों को रखें। सांस लेने के दौरान, उपर की ओर देखकर अपने सिर के साथ जमीन से अपनी सीने उठायें। धीरे-धीरे, अपने ऊपरी शरीर को अपने नाभि क्षेत्र तक उठाएं और 5 से 10 गहरी सांस लेने तक इस मुद्रा को बनाए रखें।

इन सब योग के अलावे नौका आसन (बोट पोज़), पश्चिमोत्तन आसन आदि भी लाभकारी होतें है.

योग से प्रजनन क्षमता कैसे बढ़ता है?





- योग आपके शरीर और दिमाग पर तनाव कम करता है जो प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने में सहायक है।

- योग ग्रंथियों को उत्तेजित करता है और प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन को मुक्त करने में मदद करता है।

- योग श्रोणि क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है जो उस क्षेत्र को उत्तेजित करता है और गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाता है।

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