सांस फूलने का इलाज -अस्थमा (दमा) की पहचान, कारण और बचाव के बारे में जानें

गहरी सांस न ले पातें हैं या सांस की तकलीफ है तो हो सकती है ये गंभीर बीमारी | अस्थमा (दमा) के लक्षण, कारण और बचाव की जानकारी


अस्थमा जिसे आम बोल चाल के भाषा में “दमाके नाम से भी जानते हैं, स्वसन और फेफड़ो से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जो श्वास नलिकाओं को प्रभावित करती है। अस्थमा होने के कारण इन नलिकाओं की भीतरी दीवार में सूजन और संकुचन पैदा हो जाता है जिससे फेफड़ो में वायु का प्रवाह सही ढंग से नहीं हो पाता हैं जिस कारण छोटी-छोटी सांस लेनी पड़ती है।


इस बीमारी के होने का विशेष उम्र नहीं होता है बल्कि ये किसी भी उम्र में कभी भी ये बीमारी हो सकती है। वैसे तो इस बिमारी का अभी तक कोई प्रमाणित इलाज संभव नहीं हो पाया है, लेकिन कुछ ट्रीटमेंट और ऐहतियात बरत के हम इसपर कंट्रोल पा सकते हैं। सबसे पहले ये जानना जरूरी है की एलर्जी का कारण क्या है एक बार पता हो जाने के बाद उस हिसाब से ट्रीटमेंट हो पाता है-

अस्थमा की पहचान और लक्षण | Signs of Asthama disease :


  • सांस फूलना या सांस लेने में कठिनाई होना।
  • सीने में जकड़न जैसा महसूस होना।
  • जोर-जोर से सांस लेना, जिस कारण से थकान महसूस होना।
  • बलगम वाली या बिना बलगम के सूखी खाँसी होना।
  • साँस लेते या बोलते समय एक घरघराहट जैसी आवाज आना।
  • ठंडी हवा में सांस लेने से स्थिति और गंभीर हो जाना।





दमा (अस्थमा) के कारण - Asthma Causes :



1. दमा का आम कारण वायु प्रदुषण है - Asthma Due to Air Pollution & Allergy


दमा के होने के बहुत से कारण हो सकते हैं, लेकिन उनमें से सबसे बड़ा वायु प्रदुषण होता है। प्रदुषित हवा में सांस लेते समय आपको एलर्जी हो सकती है। इनमें ट्रैफ़िक का धुआँधूल के कणऔद्योगिक धुआँ (विशेषकर सल्फर डाइऑक्साइड युक्त), के साथ साथ घरेलु वातावरण में गंदगी, बदबू, गंदे बिस्तर, पुरानी किताबें और कपड़ों की झाड़, खेतों की झाड़, सुगंधित सौंदर्य प्रसाधन (Perfumed cosmetics), सुगंधित फूल, घरेलू रसायन (एयर फ्रेशनर और एयरोसोल) आदि शामिल हो सकते हैं। एलर्जी के कारण श्वास नलिकाओं में बलगम पैदा हो जाता है जो कष्ट को और भी बढ़ा देता है।

2. आनुवांशिकता (Genetic) के कारण अस्थमा | Asthma Related to Genetics


अस्थमा (दमा) एक वंशानुगत बिमारी है। वंशानुगत बीमारियां ऐशी हार्मोनल बीमारियां होती हैं जो की हमे बड़े-बुढो से स्वतः मिल जाती हैं । यानि की अगर किसी परिवार में कोई बड़े-बुजर्ग इस रोग से प्रभावित होते हैं तो एक ही हार्मोन होने की वजह से उनके बच्चो को अस्थमा के होने की संभवाना काफी बढ़ जाती हैं।

3. तनाव और खराब जीवनशैली | Stress and Poor lifestyle


मानसिक तनाव, क्रोध और अधिक डर जैसी भावनाएं और मानसिक उत्तेजना के कारण हृदय गति और श्वास पैटर्न बदलता है। यह श्वासमार्ग में रुकावट का कारण बनता है, आज के आधुनिक युग में हमारी जीवनशैली जितनी व्यस्त हो रही है उतना ही ज्यादा खराब भी हो रही हैं । शारीरिक क्षमता में कमी , खराब खानपान , स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भी अस्थमा (दमा) का एक महत्वपूर्ण कारण हैं। ज्यादा Salt और junk foods खाने से अस्थमा (Asthma) होने का खतरा बढ़ता है ।




4. सर्दी, फ्लू संक्रमण के कारण | Asthma Caused by Respiratory Infection


सर्दी, फ्लू, ब्रोंकाइटिस और साइनसाइटिस (sinusitis) संक्रमण के विषाणु या बैक्टीरिया से श्वसन संक्रमण के कारण अस्थमा हो सकता है। ये विशेष रूप से बच्चों में अस्थमा का एक आम कारण है।

5. दवाईयां हो सकती हैं दमा का कारण - Drugs Causes Asthma


कुछ ओवर-द-काउंटर दवाएं जैसे एस्पिरिन और सूजन कम करनी वाली नॉन-स्टेरायडल दवाएं (आईब्यूप्रोफेन/ब्रुफेन और बीटा ब्लॉकर्स) अस्थमा के लिए एक ट्रिगर की तरह काम कर सकती है। औषधियों / दवाएं का अधिक प्रयोग करने के कारण कफ़ सूख जाने से दमा हो जाता है।

6. अन्य कारण अस्थमा होने के | Others reason for Asthma


धूम्रपान,अधिक व्यायाम,शराब का सेवन आदि भी इसके कारण होते है। सिगरेट के धुएं में विभिन्न रसायन और गैस होती है जो फेफड़ों में समस्या पैदा कर सकते हैं। अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति जब धूम्रपान करते हैं तो खाँसी और घरघराहट (wheezing) जैसे लक्षण और गंभीर हो जाते हैं। अधिक शारीरिक श्रम करने से भी यह बढ़ जाता है। ज्यादातर शराब और बियर में सल्फाइट की मात्रा अधिक होती है। शरीर में सल्फाइट के प्रति संवेदनशीलता के कारण अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं।


अस्थमा ठीक करने के उपाय (दमा से बचाव) - Prevention of Asthma






जैसा कि हम जानते है कि दमा (सांस फूलने का इलाज) का कोई इलाज नहीं होता है। लेकिन दवा या कुछ घरेलु उपायों के द्वारा इसके कष्ट को कम किया जा सकता है-

अस्थमा प्रमुख समस्याओं में से एक हैं दुनियाभर में लाखों लोग इससे पीड़ित हैं। अस्थमा की समस्या में आप बारिश का आनंद नहीं ले पाते हैं, थोड़ा सा शारीरिक व्यायाम करने के बाद आप थका हुआ महसूस करते हैं। आप आइस-क्रीम, शीतल पेय आदि का भी सेवन नहीं कर पाते हैं। लेकिन उचित दवा, पौष्टिक आहार और स्वस्थ जीवन शैली को अपनाकर अस्थमा-मुक्त जीवन फिर से जिया जा सकता है। अपने आहार और जीवन शैली में कुछ बदलाव करें और दमा की समस्या से निजात पाएं-

  • इन्हेलर (inhaler) को अपने पास रखें- अस्थमा दवाओं को इनहेलर के रूप में दिया जाता है। ये बाज़ार में या ऑनलाइन साईट जैसे 1mg.com, Amazon.in और Flipkart पे आसानी से मिल जायेंगी।
  • साइट्रस फूड जैसे संतरे का जूस, हरी गोभी में विटामिन सी की मात्रा अधिक पायी जाती हैं और यह अस्‍थमा के मरीज़ों के लिये अच्‍छे होते हैं।
  • ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें विटामिन बी की मात्रा ज़्यादा होती है जैसे दाल और हरी सब्ज़ियां, वो अस्थमैटिक्स को अटैक से बचाती हैं। ऐसा भी पाया गया है कि अस्थमैटिक्स में नायसिन और विटामिन बी 6 की कमी होती है।
  • एयरटाइट गद्दे .बॉक्स स्प्रिंग और तकिए के कवर का इस्तेमाल करें ये वे चीजें है जहां पर अक्सर धूल-कण होते है जो अस्थमा को ट्रिगर करते है।
  • योग-व्यायाम और ध्यान (meditation) के द्वारा खुद को शांत रखें।



अस्थमा को ठीक करें घरेलू उपचार से

दमबेल के पत्ते को गोले की तरह बनाकर इसमे काली मिर्च डालिए और पान की तरह चबा-चबा कर सुबह खाली पेट खा लीजिये। ऊपर से थोड़ा गर्म पानी पीना है। कुछ देर में उल्टी हो सकती है जो की इस उपचार का भाग है। जब आपको उल्टी होती है तब सारा जमा हुआ कफ बाहर निकल जाता है। ये एक स्वाभाविक प्रक्रिया है आपको बिलकुल नहीं घबराना है। जब कफ निकल जाएगा तो उल्टी बंद हो जायेगी। ऐसे तीन दिन तक खाली पेट सेवन करने से अस्थमा जैसा कठिन रोग काफी ठीक हो जाएगा। 

       इसके बाद रोगी को एक महीने तक घी, तेल और सभी प्रकार की खट्टी चीजो को बिलकुल नहीं खाना है।


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