उसना चावल खाने के फायदे | Parboiled rice in hindi

उसना चावल (Parboiled rice) के फायदें, बनाने की विधि और संबंधित जानकारी


धान को छिलके सहित आधा उबालने के बाद उसे सुखाकर जो चावल निकाला जाता है उसे 'उसना या उबला चावल' कहते हैं। वैसे तो बहुत पहले से ही यह मान्यता रही है कि उसना चावल सेहत के लिए बढ़िया है दुसरे चावलों के अपेक्षा। मगर जब कई शोधों के जरिये यह बात सामने आई कि अरवा चावल खाने वालों में शुगर बढने का रिस्क बढ़ जाता है, तो पूरी दुनिया में इसकी खूब चर्चा हो रही है। उसना चावल तैयार करने के दौरान विटामिन छिलके से हटकर चावल पर चिपक जाते हैं। इस कारण उसना चावल में विटामिन ज्यादा और कार्बोहाइड्रेट कम हो जाता है।

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उसना चावल के फायदें :

1. अधिक पोषक तत्व

विशेष प्रसंस्करण के कारण, उसने चावल नियमित सफेद चावल की तुलना में फाइबर, कैल्शियम, पोटेशियम और विटामिन B-6 का बेहतर स्रोत है। इसमें ज्यादा मैग्नीज होने से ये ब्लड प्रेशर को कम करने और दिल के दौरे के खतरे को कम करने में मदद करते हैं। इसमें ज़िंक भी काफी होता है, जो इम्यून सिस्टम मजबूत बनाता है।

2. डायबिटीज़ के मरीज़ों के उपयुक्त

मैगनेशियम के कमी से इंसुलिन बनाने की प्रक्रिया में बाधा पहुंचती है। इंसुलिन का सही ढंग से निर्माण न होना या इसकी कमी होना ही डायबिटीज पैदा करता है। अगर आप रोज उसना चावल खाते हैं, तो शरीर की प्रत्येक दिन की आवश्यकता का 88 प्रतिशत मैग्नेशियम आपको मिल जाता है। इसलिए ये डायबिटीज़ के मरीजों और उन लोगों के लिए जिन्हें शुगर पर कंट्रोल करना है, अच्छा है। इस तरीके से चावल खाने से वज़न कम करने में भी मदद मिलती है।

3. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

इन चावलों में काफी ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो इनफ्लेमेशन और कैंसर से बचाव करता है।




4. पचाने में आसान

ये चावल पाचन तंत्र को अपना काम आसानी से करने में मदद करते हैं। दस्त और कब्ज जैसी समस्याओं में इनका सेवन अच्छा रहता है। बॉवेल सिस्टेम को भी ये चावल स्वस्थ रखते हैं।

5. कम कैलरी की मात्रा

उसना राइस में कैलरी की मात्रा कम होती है, क्योंकि उसना चावल हल्का फूला हुआ होता है और अपने आकार के अनुसार इसका वजन कम होता है।

अरवा चावल या उस्ना चावल ?

अरवा चावल बनाने के दौरान मिलिंग और पॉलिशिंग की जाती है, जिससे उसमें मौजूद 60-70 प्रतिशत विटामिन्स, 50 प्रतिशत मैगनेशियम एवं फ़ॉसफ़ोरस, करीब 60 प्रतिशत आयरन और सारा-का-सारा डायटरी फ़ाइबर एवं फ़ैटी ऐसिड नष्ट हो जाता है। इनकी कमी से इंसुलिन बनाने की प्रक्रिया में बाधा पहुंचती है। इंसुलिन का सही ढंग से निर्माण न होना या इसकी कमी होना ही डायबिटीज पैदा करता है। अगर आप रोज उसना चावल खाते हैं, तो शरीर की प्रत्येक दिन की आवश्यकता का 88 प्रतिशत मैग्नेशियम आपको मिल जाता है। यह मैगनेशियम हमारे इंसुलिन प्रोडक्शन से लेकर हेल्दी नर्वस सिस्टम, सेक्स हार्मोन आदि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें जो फ़ाइबर होता है, वह हमारे हेल्थ के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है। यह आंतों के कैंसर और हार्ट की बीमारी से भी बचाता है।

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उसना चावल कैसे बनाते है :

धान को पहले पानी में कुछ समय भिंगोकर रखा जाता है, फिर उसे आंशिक रूप में उबाला जाता है और लास्ट में सुखा लिया जाता है। इसके बाद ढेंका या मशीन से चावल निकाल ली जाती है। इस प्रक्रिया के करने से चावल में चमक आती है तथा उसमें पोषक तत्त्व अधिक रह जाते हैं। 





भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यान्मार, मलेशिया, नेपाल, श्री लंका, गिनिया, दक्षिण अफ्रीका, इटली, स्पेन, नाइजेरिया, थाईलैण्ड, स्विट्जरलैण्ड और फ्रांस में उबालकर चावल निकालने की विधि प्रचलित रही है।

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