सरकारी कंपनी के निजीकरण के फायदे और नुकसान (Merits and demerits of privatisation in hindi)

जानिये, सरकारी संस्था (बैंक, रेलवे आदि) के निजीकरण से क्या बदलाव होगा।

सरकारी संस्था के स्वामित्व या व्यवसाय का निजी क्षेत्र में ट्रान्सफर 'निजीकरण' कहलाता है। इसके अंतर्गत सरकार अपनी स्वामित्व वाली संस्था से विनिवेश करती है कुछ शेयर्स को बेचकर, या पुरी स्वामित्व का ट्रान्सफर PPP (पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप) मोड में कर दिया जाता है तय समय अवधी के लिये।


अधिक जानकारी के लिए ये पढ़ें - निजीकरण क्या है? (Privatisation definition in hindi)

benefits of privatisation in hindi


सरकारी संस्था के निजीकरण से फायदें होते है तो कुछ नुकसान भी है। इससे अर्थव्यवस्था सकारात्मक और साथ ही नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है, इससे होने वाले बदलाव के बारे में निचे विस्तार से बताया गया है। जिसे पढ़ के आप स्वयं निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं।


निजीकरण के फायदें (Benefits of privatisation):

  1. इससे बाजार में एक हेल्थी कम्पटीशन बनता है
  2. रोजगार पैदा होती है,
  3. यह ग्राहक सेवाओं और वस्तुओं के मानक में सुधार करके लाभ को अधिकतम करने के लिए काम करता है,
  4. भ्रस्टाचार में कमी आती है…इत्यादि।

जब सरकार अपनी संस्था या कंपनी चलाती है, तो उसे अच्छी सेवा देने की कोई प्रेरणा नहीं होती है। वे अपनी जेब से पैसा नहीं लगा रहे हैं, करदाताओं के पैसे का उपयोग कर रहे हैं। ठीक यही कारण है कि यहाँ घोटाले होते हैं, भारत के अधिकांश सार्वजनिक क्षेत्र को नुकसान उठाना पड़ रहा है। अच्छी सेवा को भूल जाइये।


जब प्राइवेट सेक्टर की बात आती है, तो उनके पास एक प्रेरणा होता है - लाभ। यही वह है जो उन्हें लोगों को अच्छी सेवा देने के लिए प्रेरित करता है। लालच अच्छा होता है जब कुछ कमाने की बात आती है। यह वह लालच है जो हमारी अर्थव्यवस्था को विकसित करता है। निजी क्षेत्र अत्यधिक कुशल है क्योंकि वे इसे अपनी जेब से पैसे दे रहे हैं।


उदाहरण के लिये, अगर आपको कोई सरकारी बैंक (SBI, PNB) में काम हो तो उसमें परेशानी आम बात है, कोई गंभीर मामला हो तो सुनवाई नहीं होती। लेकिन प्राइवेट बैंक वाले आपके घर आकर अकाउंट खोल जाते है, और अन्य कार्य भी आसानी से हो जाते है। इसी तरह अगर आप कोई प्राइवेट मोबाइल कंपनी का कनेक्शन लेते है तो आसानी से उसका सिम मिलता है और तुरंत चालू हो जाता है जबकि BSNL का सर्विस जल्दी स्टार्ट ही नही हो पाता है और काल ड्राप की समस्या होती रहती है।


निजीकरण के नुकसान (Demerits of privatisation):

  1. कर्मचारी को दी जाने वाली सैलरी कम होगी, सार्वजनिक क्षेत्र के मुकाबले।
  2. कंपनियों का एकाधिकार से उत्पन्न समस्या 

निजीकरण से निजी कंपनियों का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। वे अपनी सेवा या वस्तु की कीमतें बढ़ा सकते हैं जो भी वे चाहे। अकुशल, दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले गरीब लोग के लिए निजीकरण काम नहीं भी कर सकता है। प्राइवेट कर्मचारी स्वयं समाज के इन वर्गों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पहल नहीं करेंगे। वे इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि उन्हें बेहतर और स्थायी लाभ मिलता रहे।


निष्कर्ष: निजीकरण कुछ सेक्टर में आवश्यक है उसकी कार्यकुशलता बढ़ाने के लिये, लेकिन कुछ क्षेत्रों की समस्या का समाधान नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्रों का बहुत अधिक निजीकरण उपयुक्त नहीं है क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र मौजूद है ताकि गरीब लोग भी बुनियादी मानवीय जरूरतों को पूरा कर सकें। परिवहन, अस्पताल, शिक्षा में निजी और सार्वजनिक कंपनियों का संतुलन होना चाहिए। पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (PPP) मोड में इन्हें कुशलता से चलाया जा सकता है।


तो नागरिक सेवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल जैसे कुछ क्षेत्रों के लिए, सरकार को योजना बनाना चाहिये। संसाधन/सब्सिडी प्रदान कर, निजी क्षेत्र द्वारा कार्य का निष्पादन करवाना चाहिये (नॉट फॉर प्रॉफिट), “ट्रस्ट” मॉडल को बेहतर तरीके से विकसित करना चाहिये।


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