महिला सशक्तिकरण और इसके लाभ, आवश्यकता आदि की जानकारी

महिला सशक्तिकरण | इसकी आवश्यकता और निष्कर्ष

  
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।

अर्थ : जहां स्त्रीजाति का आदर-सम्मान होता है, उनकी अपेक्षाओं की पूर्ति होती है, उस परिवार तथा समाज पर देवतागण प्रसन्न रहते हैं। जहां ऐसा नहीं होता और उनके प्रति उचित व्यवहार नहीं किया जाता है, वहां देवकृपा नहीं रहती है और वहां किये गये कार्य सफल नहीं होते हैं।

पुराने जमाने में महिलाओं को बंधनों में बांधा जाता था, महिलाएं अपनी मर्जी से कोई भी काम नहीं कर पाती थी और उनके ऊपर पूरा का पूरा नियंत्रण उनके पति और घर के बड़े बुजुर्गों का रहता था. इससे महिलाएं आगे नहीं बढ़ पाती थी और राष्ट्र का निर्माण में इनकी की भूमिका नहीं रहती थी, उनका दायरा महज घर की रसोई तक सीमित रहता था। लेकिन आज अगर हम राष्ट्र का चौमुखी विकास चाहते हैं तो महिलाओं को अधिकार देना बहुत आवश्यक है. तो आज हम बात करेंगे महिला सशक्तिकरण की।

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महिला सशक्तिकरण | Women empowerment


महिला सशक्तिकरण पर बात जारी रखने के लिए पहले हम महिला सशक्तिकरण शब्द का अर्थ समझ लेते हैं. महिला सशक्तिकरण का मतलब होता है महिलाओं का पारिवारिक बंधनों से मुक्त होकर अपने और अपने देश के विषय में सोचने की क्षमता का विकास। अर्थात महिला सशक्तिकरण से हम ये से समझते है कि महिलाएं अपने निर्णयो के लिए किसी अन्य पर निर्भर ना हो और वह अपने जीवन के विषय में खुद निर्णय ले सकें।

महिला सशक्तीकरण कोई नई अवधारणा नहीं है और इसकी आवश्यकता आजादी से पहले भी बहुत पहले समझी गई थी। केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में महिलाओं ने अत्याचारों का सामना किया है।

क्यों आवश्यक है महिला सशक्तीकरण? | उद्देश्य





अभी भी भारत के कई हिस्सों के समाज में महिलाओं को उचित अधिकार प्राप्त नहीं है उन्हें पुरुषों से कमतर समझा जाता है इसीलिए हमें जरूरत है महिला सशक्तिकरण की।
  • महिला सशक्तिकरण के बिना अन्याय, लैंगिक पक्षपात और असमानता को दूर नहीं किया जा सकता है।
  • यदि महिलाएं सशक्त नहीं हैं तो वे अपनी खुद की पहचान विकसित नहीं कर सकती हैं।
  • यह उन्हें एक सुरक्षित कार्य वातावरण भी प्रदान करता है।
  • महिलाएं जीवन में सुरक्षा और संरक्षण का आनंद नहीं ले सकती हैं यदि वे सशक्त नहीं हैं।
  • सशक्तिकरण महिलाओं के सामने आने वाले शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में कार्य करता है।
  • यह महिलाओं के लिए कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
  • न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए महिलाओं को काम के समान अवसर प्रदान किए जाने की आवश्यकता है।


भारतीय इतिहास में महिलाओं को पूजनीय माना गया है, हम भारतवासी महिलाओं को हमेशा से एक ऊंचे दर्जे का सम्मान देते थे। ग्रंथों और पुराणों में इस चीज का उल्लेख मिलता है कि भारत में हमेशा से देवताओं के साथ साथ देवियों को भी पूजा जाता है और यह परम्परा सदियों से चली आ रही है। 

महिलाओं की ऋग-वैदिक काल में एक बेहतर स्थिति थी जो वैदिक सभ्यता में बिगड़ गई। वैदिक सभ्यता के बाद, महिलाओं को शिक्षा के अधिकार, विधवा पुनर्विवाह के अधिकार, विरासत के अधिकार और संपत्ति के स्वामित्व से वंचित कर दिया गया। बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयाँ महिलाओं के लिए स्थितियों को और अधिक खराब करती हैं। गुप्त काल के दौरान, महिलाओं की स्थिति बेहद खराब हो गई और दहेज और सती प्रथा जैसी कुप्रथाएं अधिक प्रमुख हो गईं।

ब्रिटिश राज के दौरान, राजा राम मोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर और ज्योतिराव फुले जैसे कई समाज सुधारकों ने महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए आंदोलन शुरू किया और उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप सती-प्रथा को समाप्त कर दिया गया और विधवा पुनर्विवाह अधिनियम तैयार किया गया। अगर आप इतिहास के विद्यार्थी हैं तो आपने कभी ना कभी यह जरूर पढ़ा होगा कि भारत के विकास में महिलाओं का हमेशा से अद्वितीय योगदान रहा है। 1857 की क्रांति मे लक्ष्मीबाई ने भी अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे जिस कारण वो अभी तक याद रखी जाती हैं।

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जैसे किसी गाड़ी को चलने के लिए सिर्फ ईंधन की जरूरत नहीं होती, पहियों की जरूरत भी होती है उसी प्रकार है अगर हम किसी देश के विकास में गति लाना चाहते हैं तो हमें आज के समय में महिला सशक्तिकरण की विशेष आवश्यकता है। बिना महिला सशक्तिकरण के देश का विकास रफ्तार नहीं पकड़ सकता। आज भी भारत समेत दुनिया के कई ऐसे देश हैं जहां महिलाओं को पुरुषों से कम अधिकार प्राप्त हैं.

भारतीय संविधान में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिए गए हैं और उन्हें पुरुषों के समान दर्जा मिला है लेकिन वास्तविक जिंदगी और आंकड़े कुछ अलग कहानी बयान करते हैं। जैसे भारत में कई जगह महिलाओं की शिक्षा दसवीं तक भी नहीं हो पाती और उनकी छोटी अवस्था में ही विवाह कर दिया जाता है जिससे वह अपनी जिंदगी के निर्णय नहीं ले पाती। उनको बचपन से ही रसोई घर सौंप दिया जाता है। 

इसके अलावा भारत में लिंगानुपात महिलाओं की स्थिति को बयां कर देता है बहुत से लोगों की गंदी सोच की वजह से कन्या भ्रूण हत्या आज के भारत की मुख्य समस्या बनी हुई है. वे लोग चाहते ही नहीं कि उनके घर में किसी कन्या का जन्म हो और इसीलिए वह कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंदी करतूत को अंजाम देते हैं।



महिला सशक्तिकरण से लाभ -

1. वे सम्मान और स्वतंत्रता के साथ अपने जीवन का नेतृत्व करने में सक्षम होती हैं।

2. यह उन्हें अपनी खुद की एक अलग पहचान देता है।

3. यह उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को जोड़ता है।

4. वे समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करने में सक्षम हो पाती हैं।

5. वे समाज की भलाई के लिए सार्थक योगदान देने में सक्षम हो पाती हैं।

6. देश के संसाधन उनके लिए उचित और समान रूप से सुलभ होते हैं।

महिला सशक्तिकरण के लिए योजनाएं -

भारत सरकार बहुत से ऐसे अभियान चलाए हैं जिसमें महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया गया है. ये योजनाएं कमजोर और पीढि़त महिलाओं की आवाज उठाने में मदद कर रही हैं। उदाहरण के लिए :
  1. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ स्कीम
  2. महिला हेल्पलाइन योजना
  3. सुकन्या समृद्धि योजना
  4. स्‍वाधार गृह
  5. कामकाजी महिला छात्रावास
  6. महिला ई-हाट
  7. महिलाओं को नौकरी में 33% आरक्षण 





उपर्युक्त योजनाओं से इतना तो स्पष्ट हो जाता है कि सरकार महिलाओं के समग्र विकास के लिए हर तरह के प्रयास लम्बे समय से करती आ रही है, और यही कारण है कि आज समाज में महिलाओं की भूमिकाओं में बहुत तरह के बदलाव भी दिखायी देने लगे हैं.

निष्कर्ष -

90 के दशक के बाद भारत की स्थिति में काफी सुधार देखने को मिला है, महिलाएं आज घरों से बाहर पढ़ने के लिए जाती हैं और हर क्षेत्र मे अपना नाम रोशन करती हैं। जैसे आज महिलाएं मेडिकल, इंजीनियरिंग, शिक्षा, सुरक्षा आदि के क्षेत्र मे जा कर हर वह काम कर रही हैं जो एक पुरुष कर सकता है.

लेकिन सिर्फ नारी को आगे लाने की बात करने और सरकार द्वारा ऐसी योजना बना देने से महिला सशक्तिकरण की भावना का उचित विकास नहीं हो सकता। अतः हमें जरूरत है सरकार के साथ कदम से कदम मिलाने की, अगर हम लोगों की रूढ़िवादी सोच को बदलने में कामयाब रहे और महिला सशक्तिकरण की भावना का विकास करने में संभव और सफल रहे तो हमारा देश चौमुखी विकास करेगा और जल्द ही देश से भुखमरी, गरीबी जैसी समस्याएं दूर हो जाएंगी और हमारा देश भारत भी विकसित देश की श्रेणियों में गिना जाएगा।

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